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दीवाली 2025 – तिथि, पूजा विधि, इतिहास और महत्व
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दीवाली 2025 – तिथि, पूजा विधि, इतिहास और महत्व
तिथि: 21 अक्टूबर 2025 (मंगलवार)
दीवाली, जिसे दीपावली भी कहा जाता है, भारत का सबसे प्रमुख और भव्य त्योहार है। इसे “प्रकाश पर्व” कहा जाता है क्योंकि यह अच्छाई पर बुराई, ज्ञान पर अज्ञान और प्रकाश पर अंधकार की विजय का प्रतीक है। यह पर्व कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है। 2025 में दीवाली 21 अक्टूबर (मंगलवार) को मनाई जाएगी। इस दिन का मुख्य आकर्षण लक्ष्मी पूजा है।
पाँच दिवसीय दीपावली उत्सव की शुरुआत धनतेरस से होती है और समापन भाई दूज पर होता है। इन पाँच दिनों में दीवाली का दिन सबसे महत्वपूर्ण और विशेष माना जाता है।
पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व
दीवाली से जुड़ी विभिन्न कथाएँ और मान्यताएँ भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में प्रचलित हैं:
भगवान राम का अयोध्या लौटना
सबसे प्रसिद्ध मान्यता है कि इस दिन भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण 14 वर्ष का वनवास समाप्त कर अयोध्या लौटे। रावण वध के बाद जब वे अयोध्या पहुँचे, तो लोगों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया। तभी से दीप जलाने की परंपरा शुरू हुई।
माता लक्ष्मी की पूजा
दीवाली को धन की देवी लक्ष्मी के स्वागत का दिन भी माना जाता है। मान्यता है कि इस रात माता लक्ष्मी घर-घर भ्रमण करती हैं और स्वच्छ, उज्ज्वल घरों में प्रवेश कर आशीर्वाद देती हैं।
नरकासुर वध
दक्षिण भारत में यह दिन भगवान श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुर राक्षस के वध की याद में मनाया जाता है।
राजा बलि और वामन अवतार
कुछ परंपराओं में दीवाली को भगवान विष्णु के वामन अवतार से जोड़ा जाता है, जिन्होंने राजा बलि को पाताल भेजा लेकिन उन्हें वर्ष में एक बार अपने राज्य दर्शन की अनुमति दी।
दीवाली 2025 की पूजा-विधि
घर की सफाई और सजावट
दीवाली से कई दिन पहले घरों की सफाई, रंग-रोगन और सजावट की जाती है। रंगोली, फूलों और दीपों से घरों को सजाया जाता है।
लक्ष्मी पूजा (मुख्य अनुष्ठान)
दीवाली की शाम को माता लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर की पूजा की जाती है। पूजा में दीपक, धूप, पुष्प, फल, मिठाई और कलश का उपयोग होता है।
दीप जलाना और आतिशबाजी
दीयों को घर के हर कोने, दरवाजों और खिड़कियों पर सजाया जाता है। प्रकाश से अंधकार और नकारात्मकता को दूर करने का संदेश मिलता है।
भोजन और मिठाइयाँ
इस दिन घर-घर में पकवान, लड्डू, बर्फी, गुझिया और खीर जैसी मिठाइयाँ बनाई जाती हैं।
नए वस्त्र और उपहार
लोग नए वस्त्र पहनते हैं और परिवार व मित्रों के बीच उपहार, मिठाइयाँ और शुभकामनाएँ बाँटते हैं।
क्षेत्रीय परंपराएँ
उत्तर भारत – भगवान राम की अयोध्या वापसी और लक्ष्मी पूजा पर विशेष जोर।
दक्षिण भारत – नरकासुर वध की स्मृति में दीवाली मनाई जाती है।
पश्चिम भारत (गुजरात, महाराष्ट्र) – नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के रूप में दीवाली का महत्व है। व्यापारी इस दिन चोपड़ा पूजन करते हैं।
पूर्वी भारत (पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम) – दीवाली की रात को काली पूजा मनाई जाती है।
आधुनिक समय में दीवाली
आज दीवाली न सिर्फ भारत बल्कि नेपाल, मॉरीशस, सिंगापुर, मलेशिया, ब्रिटेन, अमेरिका और कनाडा जैसे देशों में भी बड़े धूमधाम से मनाई जाती है।
ईको-फ्रेंडली दीवाली – अब कई लोग पटाखों की बजाय दीपक और एलईडी लाइट्स से दीवाली मनाते हैं।
ऑनलाइन शॉपिंग और गिफ्टिंग – आधुनिक समय में लोग ऑनलाइन गिफ्ट, ई-कार्ड और डिजिटल बधाइयों से त्योहार की खुशियाँ बाँटते हैं।
दान और सेवा – कई परिवार इस दिन जरूरतमंदों को वस्त्र, मिठाई और भोजन दान करके दीवाली मनाते हैं।
आध्यात्मिक महत्व
दीपक जलाना केवल बाहरी अंधकार को दूर करना नहीं है, बल्कि भीतर की नकारात्मकता मिटाकर ज्ञान का प्रकाश जगाना है।
माता लक्ष्मी की पूजा यह संदेश देती है कि परिश्रम, स्वच्छता और श्रद्धा से समृद्धि प्राप्त होती है।
यह पर्व हमें क्षमा, प्रेम और नए आरंभ की प्रेरणा देता है।
निष्कर्ष
दीवाली 2025, जो 21 अक्टूबर (मंगलवार) को मनाई जाएगी, केवल दीपों का त्योहार नहीं है बल्कि जीवन, प्रेम और नए आरंभ का उत्सव है। यह हमें सिखाती है कि अच्छाई सदैव बुराई पर विजय प्राप्त करती है और प्रकाश सदैव अंधकार को हराता है।
इस दीवाली आइए हम अपने घर ही नहीं, बल्कि अपने दिलों को भी रोशनी से भरें और प्रेम, करुणा और सद्भाव से संसार को प्रकाशित करें।