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एससीओ शिखर सम्मेलन 2025 पीएम मोदी का कूटनीतिक मास्टरस्ट्रोक और भारत का वैश्विक प्रभाव
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- कामिनी शर्मा@medgallant.com
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एससीओ शिखर सम्मेलन 2025 में पीएम मोदी का पावर मूव: भारत के वैश्विक प्रभाव को मजबूत करना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीन यात्रा और तियानजिन में आयोजित 25वें शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन 2025 में भागीदारी, भारत की विदेश नीति और वैश्विक कूटनीति का एक महत्वपूर्ण क्षण साबित हुई। इस शिखर सम्मेलन में चीन, रूस, पाकिस्तान और मध्य एशियाई देशों सहित आठ सदस्य देशों के नेता एक साथ आए, जिससे यह क्षेत्रीय सुरक्षा, व्यापार और रणनीतिक साझेदारी के लिए एक अहम मंच बन गया। मोदी की यात्रा केवल प्रतीकात्मक नहीं थी; यह भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और वैश्विक मंच पर उसके बढ़ते प्रभाव को दर्शाने वाला एक सुविचारित कूटनीतिक कदम था।
1. चीन की ऐतिहासिक यात्रा
सात वर्षों के बाद पीएम मोदी का यह पहला चीन दौरा था और उनका स्वागत भव्य तरीके से किया गया। उनके आगमन पर गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया और उन्हें चीन की प्रतिष्ठित होंगची L5 कार में ले जाया गया, जो आमतौर पर राष्ट्रपति शी जिनपिंग और शीर्ष विदेशी गणमान्य व्यक्तियों के लिए आरक्षित रहती है। इस गर्मजोशी ने भारत-चीन संबंधों में सकारात्मक बदलाव का संकेत दिया, खासकर सीमा तनाव के वर्षों के बाद।
2. मोदी, शी और पुतिन: रणनीतिक त्रिकोण
सम्मेलन का सबसे चर्चित क्षण प्रधानमंत्री मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की आत्मीय मुलाकात रही। मुस्कुराहटें, हाथ मिलाना और अनौपचारिक बातचीत ने तीनों नेताओं के बीच नई दोस्ती का संकेत दिया। यह दृश्य पश्चिमी देशों, विशेषकर अमेरिका को संदेश था कि वैश्विक परिदृश्य बदल रहा है और बहुध्रुवीय दुनिया की ओर झुकाव बढ़ रहा है।
3. पीएम मोदी के भाषण की प्रमुख बातें
प्रधानमंत्री मोदी ने एससीओ में भारत की दृष्टि को तीन स्तंभों पर आधारित बताया — सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर:
• सुरक्षा को मजबूत करना
मोदी ने आतंकवाद, संगठित अपराध और कट्टरपंथ के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई पर जोर दिया। उन्होंने आतंक वित्तपोषण नेटवर्क को रोकने में सहयोग की आवश्यकता बताई।
• कनेक्टिविटी बढ़ाना
भारत ने क्षेत्रीय अवसंरचना के एकीकरण पर बल दिया, खासकर चाबहार पोर्ट और अंतर्राष्ट्रीय नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर जैसे प्रोजेक्ट्स पर, जिससे व्यापार और सप्लाई चेन लचीलापन बढ़ेगा।
• अवसर पैदा करना
मोदी ने नवाचार, डिजिटल परिवर्तन, युवाओं के सशक्तिकरण और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को आर्थिक विकास का मार्ग बताया।
4. भारत-चीन संबंधों का रीसेट
सम्मेलन का एक बड़ा आकर्षण पीएम मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की द्विपक्षीय बैठक रही। दोनों नेताओं ने सीमा पर शांति बनाए रखने और विश्वास बहाली के लिए काम करने पर सहमति जताई।
मोदी ने कहा कि भारत और चीन को एक-दूसरे को प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि विकास सहयोगी के रूप में देखना चाहिए। वहीं शी ने क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भारत के साथ काम करने की इच्छा जताई।
5. रूस के साथ संबंधों को मजबूती
पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की मुलाकात में दोनों देशों की "विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी" को दोहराया गया। प्रमुख चर्चाएं इस प्रकार रहीं:
• व्यापार और निवेश के नए अवसरों का विस्तार
• ऊर्जा सहयोग, खासकर तेल और गैस आपूर्ति
• अंतरिक्ष, रक्षा और तकनीकी क्षेत्रों में साझेदारी
• वैश्विक संघर्षों के शांतिपूर्ण समाधान तलाशना
6. अमेरिका और पाकिस्तान को संदेश
मोदी की उपस्थिति ने अप्रत्यक्ष रूप से कई संदेश दिए:
• अमेरिका को: भारत रणनीतिक स्वायत्तता के लिए प्रतिबद्ध है और किसी एक ब्लॉक के साथ पूरी तरह नहीं जुड़ेगा, खासकर हाल ही में अमेरिकी शुल्क वृद्धि के बाद।
• पाकिस्तान को: मोदी ने स्पष्ट कर दिया कि भारत आतंकवाद का विरोध जारी रखेगा और उम्मीद करता है कि सभी एससीओ सदस्य क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने में जिम्मेदारी निभाएंगे।
7. एससीओ पर चीन की नई दृष्टि
राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने शिखर सम्मेलन में एससीओ का नया रोडमैप प्रस्तुत किया:
• बुनियादी ढांचे के लिए एससीओ डेवलपमेंट बैंक की स्थापना
• यूरेशिया में ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर को बढ़ावा देना
• स्थानीय मुद्राओं में व्यापार, डॉलर पर निर्भरता कम करना
• सदस्य देशों के बीच तकनीकी सहयोग को प्रोत्साहन
भारत ने इन पहलों का स्वागत किया लेकिन पारदर्शिता और निष्पक्ष भागीदारी पर जोर दिया।
8. भारत के रणनीतिक लाभ
मोदी की एससीओ यात्रा भारत के लिए कई दीर्घकालिक लाभ लेकर आई:
• एशिया में भारत का भू-राजनीतिक प्रभाव बढ़ाना
• व्यापार और अवसंरचना के नए अवसर
• चीन से संबंध सुधारना और रूस के साथ साझेदारी गहरी करना
• भारत को जिम्मेदार वैश्विक नेता के रूप में प्रस्तुत करना
• बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में भारत की अहम भूमिका स्थापित करना
निष्कर्ष
तियानजिन, चीन में आयोजित एससीओ शिखर सम्मेलन 2025 में प्रधानमंत्री मोदी की भागीदारी भारत की विदेश नीति का रणनीतिक मास्टरस्ट्रोक रही। चीन और रूस के साथ संतुलन बनाते हुए, आतंकवाद पर कड़ा रुख अपनाकर और आर्थिक कनेक्टिविटी को बढ़ावा देकर मोदी ने भारत को क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक प्रभाव का प्रमुख चालक बनाया। जैसे-जैसे एससीओ विकसित होगा, भारत की भूमिका और मजबूत होगी, और यह शिखर सम्मेलन देश के अंतर्राष्ट्रीय भविष्य के लिए एक निर्णायक क्षण साबित होगा।