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भारत के त्यौहार – नवम्बर 2025: रोशनी, आस्था और संस्कृति का संगम
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- कामिनी शर्मा@medgallant.com
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भारत के त्यौहार – नवम्बर 2025: रोशनी, आस्था और संस्कृति का संगम
भारत का त्योहार कैलेंडर कभी थमता नहीं, और नवंबर का महीना उनमें से सबसे जीवंत और रंगीन होता है। जैसे ही ठंडी हवाओं का आगमन होता है, मंदिर दीपों से जगमगाने लगते हैं, घाटों पर भक्ति गीत गूंजते हैं और मेलों से सजी गलियों में रौनक छा जाती है। पूर्व में फसल उत्सव से लेकर दक्षिण में दीप पर्व तक, यह महीना विविध परंपराओं को एक सूत्र में पिरोता है।
आइए जानते हैं नवंबर 2025 में भारत में मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहारों के बारे में:
1. गोवर्धन पूजा / अन्नकूट – 1 नवम्बर 2025 दीवाली के अगले दिन मनाया जाने वाला यह पर्व उस घटना की याद दिलाता है जब भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाकर वृंदावन वासियों को वर्षा से बचाया था। इस दिन भक्तजन विभिन्न प्रकार के शाकाहारी व्यंजन बनाकर अर्पित करते हैं। उत्तर भारत के मंदिरों और घरों में अन्नकूट विशेष उत्साह से मनाया जाता है।
2. भाई दूज – 2 नवम्बर 2025 भाई-बहन के रिश्ते को समर्पित यह पर्व रक्षाबंधन की तरह है, लेकिन यह दीपावली के बाद आता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करती हैं और भाई उन्हें उपहार देते हैं। यह पर्व स्नेह और विश्वास का प्रतीक है।
3. तुलसी विवाह – 2–3 नवम्बर 2025 तुलसी माता (ग oddess लक्ष्मी का स्वरूप) और भगवान विष्णु/कृष्ण के विवाह का यह दिन शुभ माना जाता है। इसे विवाह सीजन की शुरुआत भी कहा जाता है। घरों और मंदिरों में तुलसी विवाह बड़ी श्रद्धा से किया जाता है।
4. छठ पूजा – 5–6 नवम्बर 2025 बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल सीमावर्ती क्षेत्रों का सबसे महत्वपूर्ण पर्व। यह सूर्य देव को समर्पित है। व्रतधारी महिलाएँ 36 घंटे का निर्जला उपवास रखकर उगते और डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करती हैं। गंगा, यमुना और अन्य नदियों के घाटों पर भव्य दृश्य देखने को मिलता है।
5. गुरु नानक जयंती (गुरुपुरब) – 15 नवम्बर 2025 सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी की जयंती पर पूरे भारत में विशेष आयोजन होते हैं। गुरुद्वारों में कीर्तन, लंगर और शोभायात्राएँ निकाली जाती हैं। पंजाब और दिल्ली में इसका खास महत्व है।
6. देव दीपावली – 16 नवम्बर 2025 वाराणसी में मनाया जाने वाला यह पर्व “देवताओं की दिवाली” कहलाता है। गंगा घाटों पर लाखों दीपक जलाए जाते हैं और पूरा नगर स्वर्गीय दृश्य प्रस्तुत करता है। गंगा आरती और सांस्कृतिक कार्यक्रम इस पर्व को अद्भुत बना देते हैं।
7. कार्तिगई दीपम – 17 नवम्बर 2025 तमिलनाडु का प्राचीनतम दीप पर्व, जिसमें मंदिरों और घरों में तेल के दीप जलाए जाते हैं। तिरुवन्नामलई के अन्नामलाई पर्वत पर विशाल दीप प्रज्वलित किया जाता है, जो दूर-दूर तक दिखाई देता है। यह पर्व दक्षिण भारत में विशेष महत्व रखता है।
8. क्षेत्रीय पर्व और मेले
वांगला महोत्सव (मेघालय): गारो जनजाति का फसल उत्सव, जिसमें नगाड़े, संगीत और पारंपरिक नृत्य का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।
सेंग कुट स्नेम (मेघालय): खासी जनजाति का पर्व, जो अपने पूर्वजों और परंपराओं के सम्मान में मनाया जाता है।
पुष्कर ऊँट मेला (राजस्थान): रेगिस्तान के शहर पुष्कर में आयोजित यह मेला व्यापार, धार्मिक आस्था और पर्यटन का अनोखा संगम है। यहाँ रंग-बिरंगे कपड़े, ऊँटों की दौड़ और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ देखने को मिलती हैं।
9. एडवेंट संडे – 30 नवम्बर 2025 ईसाई समुदाय के लिए एडवेंट संडे क्रिसमस की तैयारी का पहला दिन है। चर्चों में विशेष प्रार्थना सभाएँ होती हैं और इस दिन से धार्मिक उपवास व आराधना की शुरुआत होती है।
अन्य महत्वपूर्ण आयोजन –
गंगा महोत्सव (वाराणसी): नवंबर में गंगा तट पर पाँच दिन का सांस्कृतिक उत्सव आयोजित होता है। इसमें संगीत, नृत्य और आतिशबाजी का शानदार मेल होता है।
गुरु तेज बहादुर शहीदी दिवस: सिख समुदाय अपने नौवें गुरु की शहादत को श्रद्धा के साथ स्मरण करता है।
नवम्बर मेलों का महीना: इस दौरान गुजरात, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में अनेक लोक मेले और सांस्कृतिक उत्सव आयोजित किए जाते हैं।
समापन नवंबर केवल ठंडी हवाओं और बदलते मौसम का ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊष्मा और सांस्कृतिक रंगों का महीना है। वाराणसी के घाटों से लेकर मेघालय की पहाड़ियों तक, यह महीना भारत की विविधता और एकता का अद्भुत चित्र प्रस्तुत करता है। चाहे आप यात्री हों या श्रद्धालु, नवंबर 2025 आपको अविस्मरणीय अनुभव देगा।