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गुरु नानक जयंती 2025: तिथि, महत्व और उत्सव

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गुरु नानक जयंती 2025: तिथि, महत्व और उत्सव

गुरु नानक जयंती 2025: तिथि, महत्व और उत्सव

गुरु नानक जयंती, जिसे गुरुपरब भी कहा जाता है, सिख धर्म के पहले गुरु और संस्थापक गुरु नानक देव जी की जयंती के रूप में मनाई जाती है। 2025 में यह पावन पर्व 14 नवम्बर को मनाया जाएगा। यह दिन न सिर्फ सिखों के लिए बल्कि पूरी मानवता के लिए प्रेरणादायक माना जाता है, क्योंकि गुरु नानक देव जी ने जीवनभर समानता, प्रेम और भाईचारे का संदेश दिया।

गुरु नानक देव जी का जीवन परिचय

गुरु नानक देव जी का जन्म 1469 ईस्वी में तलवंडी (अब ननकाना साहिब, पाकिस्तान) में हुआ था। बचपन से ही वे आध्यात्मिक और दार्शनिक प्रवृत्ति के थे। उन्होंने समाज में फैली कुरीतियों, जात-पात और अंधविश्वास का विरोध किया। उनके तीन प्रमुख सिद्धांत –

  • नाम जपो (ईश्वर का स्मरण करो)

  • किरत करो (ईमानदारी से मेहनत करो)

  • वंड छको (दूसरों के साथ बांटकर खाओ)

इन सिद्धांतों ने समाज में समानता और मानवता का मार्ग प्रशस्त किया।

गुरु नानक जयंती के उत्सव

  • अखंड पाठ: गुरुद्वारों में गुरु ग्रंथ साहिब का लगातार 48 घंटे तक पाठ किया जाता है।

  • नगर कीर्तन: भव्य जुलूस जिसमें पंज प्यारे (पांच प्रियजन), शबद-कीर्तन, झांकियां और भक्तों की टोली शामिल होती है।

  • लंगर सेवा: लंगर परंपरा गुरु नानक देव जी की सबसे महान देन है। इसमें हर जाति, धर्म और वर्ग के लोग एक साथ बैठकर भोजन करते हैं।

  • भजन और कीर्तन: गुरुद्वारों में विशेष कीर्तन, भजन और प्रवचन आयोजित किए जाते हैं

  • सजावट और रोशनी: इस अवसर पर गुरुद्वारों को रोशनी, फूलों और दीयों से सजाया जाता है।

गुरु नानक जयंती का महत्व

गुरु नानक देव जी का संदेश सिर्फ धार्मिक ही नहीं बल्कि सामाजिक सुधार से भी जुड़ा था। उन्होंने यह बताया कि सच्चा धर्म वही है जिसमें सबको बराबरी का दर्जा मिले। उन्होंने महिलाओं को भी सम्मानित स्थान दिया और भेदभाव मिटाने की शिक्षा दी।

गुरु नानक देव जी का यह उपदेश आज भी प्रासंगिक है:

  • एक ओंकार सतनाम – ईश्वर एक है।

  • सर्व मानव एक समान – किसी में ऊँच-नीच नहीं।

  • सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है – दूसरों की सेवा ईश्वर की पूजा है।

  • गुरु नानक जयंती पर परंपराएं

  • सुबह-सुबह प्रभात फेरी निकाली जाती है।

  • श्रद्धालु गुरुद्वारों में जाकर मत्था टेकते हैं और अरदास करते हैं।

  • घरों और गलियों को दीपक और मोमबत्तियों से सजाया जाता है।

  • भक्त गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करते हैं।

निष्कर्ष

गुरु नानक जयंती न केवल सिख समाज के लिए बल्कि पूरी मानवता के लिए एक प्रेरणा का दिन है। गुरु नानक देव जी का जीवन और उनकी शिक्षाएँ हमें भाईचारे, समानता, सेवा और सत्य के मार्ग पर चलना सिखाती हैं। 14 नवम्बर 2025 को यह पर्व सभी को आपसी प्रेम और सहयोग का संदेश देगा।