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धनतेरस 2025: तिथि, पूजा विधि, महत्व और परंपराएँ

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धनतेरस 2025: तिथि, पूजा विधि, महत्व और परंपराएँ

धनतेरस 2025 – तिथि, पूजा विधि और महत्व

तिथि: 19 अक्टूबर 2025 (रविवार)

धनतेरस, जिसे धनत्रयोदशी भी कहा जाता है, दीपावली के पाँच दिवसीय उत्सव की शुरुआत का दिन है। यह पर्व कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन स्वास्थ्य और समृद्धि की देवी माँ लक्ष्मी तथा आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है। वर्ष 2025 में धनतेरस 19 अक्टूबर (रविवार) को मनाई जाएगी।

धनतेरस की पौराणिक कथाएँ और महत्व

समुद्र मंथन कथा – हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, समुद्र मंथन के समय भगवान धन्वंतरि अमृत कलश के साथ प्रकट हुए थे। इस दिन को ही धनतेरस कहा जाता है और भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद एवं आरोग्य का देवता माना जाता है।

यम दीपक की कथा – एक राजा के पुत्र के विवाह के चौथे दिन उसके मरने का योग था। पुत्रवधू ने सोने-चाँदी के गहनों और दीपकों से घर के दरवाजे को सजाकर यमराज का ध्यान भटकाया। इसके कारण उसके पति की मृत्यु टल गई। तभी से धनतेरस पर यमराज के नाम का दीपक जलाने की परंपरा चली आ रही है।

धनतेरस की पूजा विधि और परंपराएँ

घर की सफाई और सजावट – इस दिन घर की साफ-सफाई, रंगाई-पुताई और सजावट का विशेष महत्व है। प्रवेश द्वार पर रंगोली और तोरण सजाए जाते हैं।

सोना-चाँदी और बर्तन खरीदना – इस दिन धातु (विशेषकर सोना, चाँदी और पीतल) खरीदना शुभ माना जाता है। इसे सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

लक्ष्मी और धन्वंतरि पूजा – सायंकाल घर में दीप जलाकर माँ लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है। इस समय मिठाई, फल, फूल और धूप अर्पित किए जाते हैं।

यम दीप दान – मृत्यु से रक्षा और दीर्घायु की कामना से घर के बाहर दक्षिण दिशा में एक दीपक जलाया जाता है।

भारत में क्षेत्रीय उत्सव

उत्तर भारत – लोग आभूषण, वाहन और नए घरेलू सामान खरीदते हैं।

गुजरात – व्यापारी और कारोबारी लोग चोपड़ा पूजन करते हैं, जिसमें खाते-बही की पूजा कर नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत करते हैं।

दक्षिण भारत – यहाँ भगवान धन्वंतरि की विशेष पूजा होती है और परिवार स्वास्थ्य-संपन्न जीवन की कामना करते हैं।

धनतेरस में पूजन सामग्री

  • माँ लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि की मूर्ति या चित्र

  • सोना-चाँदी या नए बर्तन

  • दीया और घी/तेल

  • चावल, रोली, हल्दी, सिंदूर

  • पुष्प और फल

  • मिठाई और पंचामृत

  • रंगोली और तोरण

    आधुनिक समय में धनतेरस

आज के युग में धनतेरस केवल सोना-चाँदी खरीदने तक सीमित नहीं है।

  • लोग ऑनलाइन शॉपिंग पोर्टल्स पर सोने के सिक्के, इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू सामान खरीदते हैं।

  • कई परिवार इस दिन स्वास्थ्य जांच और दान-पुण्य जैसे कार्यों को भी महत्व देते हैं।

  • पर्यावरण की दृष्टि से लोग अब मिट्टी के दीपक और इको-फ्रेंडली सजावट का उपयोग करने लगे हैं।

  • व्यापारी वर्ग नए सौदों और निवेश की शुरुआत इसी दिन करना शुभ मानते हैं।

ज्योतिषीय महत्व

  • धनतेरस के दिन त्रयोदशी तिथि होती है, जिसे धन और वैभव का प्रतीक माना जाता है।

  • इस दिन सोना और चाँदी खरीदने से परिवार में लक्ष्मी का वास होता है।

  • धन्वंतरि पूजा से रोग और शारीरिक कष्ट दूर होते हैं।

  • यम दीप जलाने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है।

निष्कर्ष

धनतेरस 2025 (19 अक्टूबर, रविवार) केवल कीमती वस्तुएँ खरीदने का दिन नहीं है, बल्कि यह समृद्धि, स्वास्थ्य और सकारात्मक ऊर्जा का स्वागत करने का पर्व है। माँ लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि की पूजा से भक्तों को धन, आरोग्य और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।