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छठ पूजा 2025: तिथि, विधि और महत्व
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- कामिनी शर्मा@medgallant.com
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छठ पूजा 2025: तिथि, विधि और महत्व
छठ पूजा 2025 की तिथि
छठ पूजा 2025 इस वर्ष 30 अक्टूबर से 2 नवम्बर 2025 तक मनाई जाएगी।
नहाय खाय: 30 अक्टूबर 2025
खरना: 31 अक्टूबर 2025
संध्या अर्घ्य: 1 नवम्बर 2025
उषा अर्घ्य (समापन): 2 नवम्बर 2025
इस चार दिवसीय पर्व के दौरान भक्तजन पूरी निष्ठा और अनुशासन के साथ सूर्य देव और छठी माई की पूजा करते हैं।
छठ पूजा की विधि (चार दिवसीय अनुष्ठान)
नहाय खाय (पहला दिन): इस दिन भक्तजन गंगा या किसी पवित्र जलाशय में स्नान करते हैं और घर को साफ-सुथरा करके सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं। भोजन में लहसुन-प्याज का प्रयोग नहीं होता और केवल शुद्ध व्रत का अन्न खाया जाता है।
खरना (दूसरा दिन): खरना के दिन व्रती दिनभर निर्जला उपवास रखते हैं। शाम को गुड़, दूध और चावल से बनी खीर, रोटी और केले का प्रसाद बनाकर पूजा की जाती है। इसके बाद व्रती रातभर का निर्जला व्रत शुरू करते हैं।
संध्या अर्घ्य (तीसरा दिन): यह दिन सबसे विशेष माना जाता है। अस्त होते सूर्य को गंगा, तालाब या नदी के किनारे खड़े होकर अर्घ्य दिया जाता है। इस अवसर पर घाटों पर भव्य सजावट, गीत-संगीत और भक्तिमय वातावरण रहता है।
उषा अर्घ्य (चौथा दिन): अंतिम दिन प्रातःकाल उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। भक्त अपने परिवार और समाज की समृद्धि, स्वास्थ्य और खुशहाली की प्रार्थना करते हैं। इसी के साथ यह पर्व संपन्न होता है।
छठ पूजा का महत्व
छठ पूजा सूर्य देव और प्रकृति की आराधना का पर्व है। सूर्य को ऊर्जा और जीवन का आधार माना जाता है। व्रती यह पूजा परिवार के स्वास्थ्य, संतान सुख और समृद्धि के लिए करते हैं।
यह पर्व पर्यावरणीय दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें नदी, तालाब और जल स्रोतों की शुद्धता और पवित्रता का ध्यान रखा जाता है। साथ ही यह सामूहिकता और सामाजिक एकता का प्रतीक भी है।
छठ पूजा का इतिहास और पौराणिक मान्यता
छठ पूजा की परंपरा वैदिक काल से जुड़ी मानी जाती है। ऋग्वेद में सूर्य देव और उनकी उपासना का उल्लेख मिलता है।
एक मान्यता है कि सीता जी ने अयोध्या लौटने के बाद छठ पूजा की थी।
वहीं दूसरी कथा के अनुसार कर्ण (महाभारत के महान योद्धा) सूर्य उपासक थे और उन्होंने ही छठ व्रत की शुरुआत की थी।
बिहार और उत्तर प्रदेश की लोककथाओं में छठ माई को प्रकृति और सूर्य की बहन कहा जाता है, जो संतान और परिवार की रक्षा करती हैं।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण
छठ पूजा का सीधा संबंध सूर्य की किरणों और ऊर्जा से है।
अर्घ्य के समय सूर्य की सीधी किरणें जल से परावर्तित होकर शरीर पर पड़ती हैं, जो स्वास्थ्य के लिए लाभकारी मानी जाती हैं।
यह पर्व डिटॉक्सिफिकेशन और मानसिक शांति में सहायक है।
उपवास और अनुशासन शरीर को शुद्ध करता है और मन को एकाग्रता प्रदान करता है।
क्षेत्रीय महत्व
बिहार और झारखंड: यहाँ छठ पूजा को सबसे बड़े त्योहार के रूप में मनाया जाता है। गंगा घाटों पर लाखों श्रद्धालु एकत्रित होते हैं।
उत्तर प्रदेश: विशेषकर पूर्वांचल में इसका भव्य आयोजन होता है।
नेपाल: तराई क्षेत्र में छठ पूजा प्रमुख रूप से मनाई जाती है।
दिल्ली, मुंबई और अन्य महानगरों में प्रवासी लोग सामूहिक रूप से इसे मनाते हैं।
निष्कर्ष
छठ पूजा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं बल्कि प्रकृति, अनुशासन और श्रद्धा का अद्भुत संगम है। यह पर्व हमें सूर्य की ऊर्जा, जल की शुद्धता और सामूहिक एकता के महत्व का संदेश देता है।