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भाई दूज 2025: तिथि, पूजा-विधि और यम द्वितीया का महत्व
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- कामिनी शर्मा@medgallant.com
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भाई दूज 2025: तिथि, पूजा-विधि और महत्व
भाई दूज, जिसे यम द्वितीया भी कहा जाता है, भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को समर्पित एक प्रमुख पर्व है। यह दीपावली के दो दिन बाद मनाया जाता है। 2025 में भाई दूज का पर्व 16 नवम्बर, रविवार को मनाया जाएगा। कुछ क्षेत्रों में इसे कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को बड़े उत्साह से मनाया जाता है।
भाई दूज की पूजा-विधि और परंपराएँ
आरती और तिलक: बहनें अपने भाइयों की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना करते हुए उनकी आरती करती हैं और माथे पर तिलक लगाती हैं।
भाई का सत्कार: बहनें भाइयों को मिठाई खिलाती हैं और विशेष भोजन कराती हैं।
भाई का उपहार: भाई अपनी बहनों को प्रेम का प्रतीक स्वरूप उपहार और साथ निभाने का वचन देते हैं।
पारिवारिक मिलन: इस दिन पूरा परिवार एक साथ भोजन करता है, जिससे आपसी प्रेम और संबंध और मजबूत होते हैं।
भाई दूज का महत्व
भाई दूज का संबंध पौराणिक कथा से है। मान्यता है कि इस दिन यमराज अपनी बहन यमुनाजी से मिलने आए थे। यमुनाजी ने उनका स्वागत करके तिलक किया और भोजन कराया। इससे प्रसन्न होकर यमराज ने वचन दिया कि इस दिन जो भी बहन अपने भाई को तिलक करेगी, उसके भाई की उम्र लंबी होगी। तभी से यह पर्व भाई-बहन के स्नेह और सुरक्षा का प्रतीक बन गया।
भाई दूज सिर्फ भाई-बहन के रिश्ते को ही नहीं, बल्कि पारिवारिक प्रेम, आपसी सहयोग और सांस्कृतिक परंपराओं को भी सुदृढ़ करता है। यह पर्व रक्षा बंधन की तरह ही भाई-बहन के अटूट रिश्ते का उत्सव है।
भाई दूज 2025 की खास बातें
यह पर्व दीपावली के तुरंत बाद आता है, जिससे त्योहारों का माहौल और भी उल्लासमय हो जाता है।
अलग-अलग राज्यों में इसे अलग नामों से मनाया जाता है – जैसे भैया दूज, भाई फोंटा (बंगाल), भाऊ बीज (महाराष्ट्र और गोवा)।
इस दिन घरों में विशेष मिठाइयाँ और व्यंजन बनाए जाते हैं, खासकर पूड़ी, कचौरी, हलवा और मिठाई।
यह पर्व भाई-बहन के रिश्ते को और गहरा बनाता है और समाज में प्यार, अपनापन और सौहार्द का संदेश फैलाता है।
निष्कर्ष
भाई दूज 2025 भाई-बहन के रिश्ते की मिठास और पवित्रता को दर्शाता है। यह पर्व हमें सिखाता है कि परिवार में प्रेम और एकता ही जीवन का सबसे बड़ा सुख है। 16 नवम्बर को मनाया जाने वाला यह दिन हर भाई-बहन के जीवन में खुशियों और आशीर्वाद का संचार करेगा।